शनिवार, 28 मार्च 2020
शुक्रवार, 20 मार्च 2020
झूठ को आओ बरगलाया जाए
झूठ को आओ बरगलाया जाए
गम को भुलाकर मुस्कुराया जाए
हम और तुम में कितने दिन जीयेंगे
आओ हंसकर ये वक्त गुजारा जाए
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कपोल भीग जाते हैं पर आँख तर नहीं होती जीने को दौड़ता हूँ पर दौड़ नहीं होती सिसकियाँ लेकर सो जाता हूँ सिसकियों में विवेक नहीं होती
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मुझसे मिलने आना तो रंजिश छोडकर आना मेरे दोस्त अगर दिल गवाही न दे तो कतई न आना बस याद कर लेना शाम की वो घडी कि हम दोनों साथ हैं हम दोनो...
