ऊट पटांग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ऊट पटांग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 4 मार्च 2017

मैं बढूंगा अपने पथ की ओर

उसने मुझसे कहा था
जिस पथ पर मैं कदम रखूँ
वह पथ स्वर्ग की ऒर जाएगा
आज यहीं सोच निकला हूँ अकेला
कि आज मैं अपने पथ पर जाऊंगा
फिर उन राहों में
क्यों न पतझड़ हो, गर्मी का अहसास हो, चमकते गरजते सावन के बादल हों, एक माँ से बिछड़ा हुआ एक बच्चे का बचपन हो, वो जो खेतों में दूसरों की भूख मिटाने को हल जोतता है।
मैं बढूंगा अपने पथ की ऒर। एक सतत प्रयास के साथ पथ पर चलूँगा पथ पर चलूँगा...

मंगलवार, 29 नवंबर 2016

वो जीना क्या जिसमें हर तरह का स्वाद न हो

वो जीना क्या जिसमें हर तरह का स्वाद न हो
चुनौती न हो, दर्द न हो, एहसास न हो, अपनापन न हो,  गम न हो, कुछ खोने पाने की चाह न हो फिर कुछ सोचने का समय न हो, घर हो घर का रास्ता न हो, रास्ता धुंधला दिखे फिर भी हमें मंज़िल साफ दिखे जैसे एहसास न हो तो क्या हो
धन्यवाद ज़िन्दगी

बुधवार, 9 नवंबर 2016

दुनिया के कुछ ऐसे देश जिनकी नहीं है अपनी करंसी

देश-मोनाको
करंसी- यूरो
यूरोपियन कंट्री मोनाको क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे छोटा देश है। देश का क्षेत्रफल 2.02 वर्ग किलोमीटर ही बचा है। कुल जनसंख्या है 37,831 के करीब। देश की पूरी अर्थव्यवस्था फ्रांस पर निर्भर है। इसके चलते यहां यूरो करंसी ही चलती है।
देश - पनामा
करंसी - अमेरिकी डॉलर
पनामा 1903 में कोलंबिया से अलग होकर स्वतंत्र देश बना। पनामा की आर्थिक व्यवस्था अमेरिका पर ही टिकी थी। इसके चलते यहां अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल होता है।
देश - जिम्बाब्वे
करंसी - अमेरिकन डॉलर
2009 में जिम्बाब्वे को भारी मंदी का सामना करना पड़ा। तब इस दक्षिण अफ्रीकी देश ने अमेरिकी डॉलर और दक्षिण अफ्रिकी रैंड जैसी विदेशी करंसी का उपयोग शुरू किया।
देश - इक्वाडोर
करंसी - अमेरिकन डॉलर
1999-2000 में इक्वाडोर को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, जिससे देश के सकल घरेलू उत्पाद में 6 प्रतिशत की कमी आ गई। देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई और बैंकिंग क्षेत्र धराशायी हो गए। इसी के चलते इक्वाडोर अन्य देशों को अपना कर्ज भी नहीं चुका पाया। ईक्वाडोर की करंसी पूरी तरह से खत्म हो गई और 2000 में राष्ट्रीय कांग्रेस ने अमेरिकी डॉलर को कानूनी रूप से स्वीकार कर लिया।

देश- कोसोवो
करंसी - यूरो
कोसोवो बाल्कन क्षेत्र में स्थित एक विवादास्पद क्षेत्र है। अब भी इसे सर्बिया संविधान स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं देता। हालांकि यूरोप के कई देश इसे स्वतंत्र देश का दर्जा दे चुके हैं। इसी के चलते कोसोवो यूरोपियन करंसी यूरो करंसी का यूज करता है।

देश- नाउरू
करंसी - ऑस्ट्रेलियन डॉलर
यह दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश है और इस देश की अपनी कोई सेना नहीं है। इसका क्षेत्रफल 21.3 वर्ग किलोमीटर में फैला है। कुल जनसंख्या है 10,000 के करीब। जर्मनी ने इस पर कब्जा कर लिया था। फस्र्ट वर्ल्ड वॉर के बाद इसे |ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन के ‘लीग ऑफ नेशंस मैंडेट एडमिनिस्ट्रेटेड’, द्वारा स्वतंत्र देश घोषित किया गया। तभी से यहां ऑस्ट्रेलियन करंसी का यूज हो रहा है।

देश - लिचटेंस्टेन
करंसी - स्विस फ्रैंक
यूरोपियन कंट्री लिचटेंस्टेट का क्षेत्रफल ही मात्र 160 वर्ग किलोमीटर है। देश की कुल आबादी (2015 की गणना के अनुसार) 36925 है, लेकिन यह प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी के मामले में दुनिया का नंबर वन देश है। फस्र्ट वर्ल्ड वॉर से पहले जर्मनी का इस देश पर कब्जा था। आजादी के बाद ऑस्ट्रिया और स्विटजरलैंड ने इसे स्वतंत्र देश की मान्यता दी। इसके बाद लिचटेंस्टेट ने स्विटजरलैंड की स्विस फ्रैंक करंसी अपना ली।

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

कि सपनों में आके सताते रहे हैं

यादों में मेरे तेरे साए रहे हैं
कि सपनों में आके सताते रहे हैं
दिल के दरवाजे पर दस्तक देकर
अजनबी से हमको चिढ़ाते रहे हैं
बाहों में मेरे तेरे वे लम्हे रहे हैं
कि हरपल मुझे गुदगुदाते रहे हैं
एक अजनबी सी दौलत वो मुझको देके
फिर मिलने का बहाना बनाते रहे हैं
न जाने क्यों मुझसे वो रूठ जाते रहे हैं
अकेला समझकर छोड़ जाते रहे हैं
क्या बताऊं वो भी रोते रहे हैं
हमको रोता छोड़ जाते रहे हैं
हसीनाओं की दुनिया में हमे पत्थर समझ
किसी और से वो दिल लगाते रहे हैं
यादों में मेरे तेरे साए रहे हैं
कि सपनों में आके सताते रहे हैं

गुरुवार, 20 अक्टूबर 2016

मातृभूमि का अपमान मां अपमान

कहते हैं जिस चीज का हम शुरू में विरोध नहीं कर पाते या फिर कहें की छोटी-छोटी चीज का विरोध करने का साहस नहीं जुटा पाते। यहां तक कि बहुत से बुद्धजीवी कह देते हैं हम क्या लेना देना तो ये वही लोग हैं कि अपना घर एक दिन लुटते हुए देखते रहते हैं और कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। ऐसा ही माहौल इस समय भारतभूमि में चल रहा है। आतंकवाद की जननी पाकिस्तान का आर्थिक और सैन्य ताकत को हमेशा दूध पिलाने वाला चीन जो कि अपने वीटो के पवार पर मसूद अजहर जैसे आतंकी को आतंकी नहीं घोषित होने देता है। अगर प्रत्येक भारतीय चीनी निर्मित सामान का बहिष्कार करें तो आर्थिक रूप से कमजोर भी होगा और उसकी पाकिस्तान को दूध पिलाने की समक्षता भी कमजोर हो जाएगी। हां, आप अगर पहले से चीनी निर्मित सामान उपयोग कर रहे हैं तो करिये, लेकिन आगे से तो ऐसा न करने की ठाने। क्योंकि एक सैनिक की जान से प्यारी हमारी उपभोग की चीजें नहीं हैं। और हां, यह जो चीनी मीडिया बौखलाहट में बोल रहा है यह मातृभूमि का अपमान है ही साथ ही मां का भी अपमान है।

शनिवार, 15 अक्टूबर 2016

LIPSTICK UNDER MY BURKHA | Official Teaser Trailer | Konkona Sensharma, ...



लिपिस्टिक अंडर माई बुर्का फिल्म जो बताती है मुस्लिम महिलाओं की दो जिंदगी के बारे में किस तरह से अपनी आजादी को जीती हैं।