लिपिस्टिक अंडर माई बुर्का फिल्म जो बताती है मुस्लिम महिलाओं की दो जिंदगी के बारे में किस तरह से अपनी आजादी को जीती हैं।
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कपोल भीग जाते हैं पर आँख तर नहीं होती जीने को दौड़ता हूँ पर दौड़ नहीं होती सिसकियाँ लेकर सो जाता हूँ सिसकियों में विवेक नहीं होती
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मुझसे मिलने आना तो रंजिश छोडकर आना मेरे दोस्त अगर दिल गवाही न दे तो कतई न आना बस याद कर लेना शाम की वो घडी कि हम दोनों साथ हैं हम दोनो...
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