गुरुवार, 22 सितंबर 2016

कुछ दूर तेरे साथ चलके यकीं कैसे कर लूं

कुछ दूर चलके तेरे साथ
यकीं कैसे कर लूं
एक लम्बे इंतजार की घड़ी को
बेसब्र की घड़ी क्यों कर लूं
एक छोटे से सफर में
मैं तुम पर यकीं कैसे कर लूं
हाथ पकड़कर यकीं तुमने दिलाया
साथ चलके हौसला तो दिखाया
पर, इस हौसले को यकीं में कैसे बदल लूं
सफर है तो मोड़ भी है
मैं हर मोड़ पर यकीं कैसे कर लूं
कुछ दूर तेरे साथ चलके यकीं कैसे कर लूं

दीप जलाए जायेंगे

कुछ पल का उबाल
कुछ पल का हाहाकार
फिर हम एक धुन में होंगे
आगे बढेंगे फिर बढेंगे
मालायें पहनाई जायेंगी
दीप जलाए जायेंगे
मेरी शहादत पर
फिर से सियासत का रंग चढ़ाया जाएगा
कुछ अपने ही कर्ता धर्ता
लानत मानत देंगे
फिर सुखभोगी की तरह
सत्ता सुख में खो जायेंगे
जयहिन्द

बुधवार, 14 सितंबर 2016

#ताज महल

आइये हम आपको अपने साथ घूमाते हैं महबूबा की याद में बनवाया गया ताज महल।


































रविवार, 11 सितंबर 2016

गुरुवार, 8 सितंबर 2016

जब भी निकलोगे

तकिये पर तुम सिर रखो
या सिरहाने किताब
जब भी निकलोगे
लोग पूछेंगे तुम्हारा हाल
लुटते-पिटते कैसे भी चलते हो
पर रहना बिल्कुल बिन्दास
चीखें और गुफ्तगू कानों को खटखटाएंगी
मसलन तुम्हे पीछे खींचना चाहेंगी
आंखें तक ताक-झांक करना चाहेंगी
पैर ठिठककर रुक जाएंगे
पर तुम निकल जाना इस दुनिया के पार
फिर तुमसे नहीं पूछा जाएगा तुम्हारा हाल

बुधवार, 7 सितंबर 2016

इशारा

जरा खिसकिये हमे बैठना है। मै खिसका ही था कि उधर से खिसको सामने एक नौजवान चिल्लाकर बोल रहे थे। हमने भी कहा, आप ही इधर बैठ जाइये। फिर वो कुछ बुदबुदाये और आकर बैठ गए। मै उठकर अगली सीट पर चला गया। क्योंकि, हमारा स्टेशन आने वाला था। इसी बीच दोस्त का फोन आ गया और हमारी बात होने लगी उसने कुछ कहा तो हमारे मुंह से निकल गया कि हिटलर ने लिखा है कि किसी भी मुनष्य को आप इसी धरती पर स्वर्ग और नर्क का एहसास करा सकते हो। हमारा ये  इशारा वो महिला समझ गई। इतने में आवाज आई बिकू और हमारे दोस्त खड़े थे उतरते ही एक-दूसरे से गले मिले। अचानक सर पर नजर पड़ी सर आप! हमने भी सोचा विवेक तुम से मिल ही लेते हैं। तुम जब भी आते हो मिल के जाते हो तो इस बार हम भी मिल लेते हैं। हमने सर को प्रणाम कि और चलने ही वाला था कि एक बार फिर से उस महिला की ओर देखा तो जैसे लगा वो कुछ कहना चाह रही है। शायद अपने अफसर के बर्ताव पर माफी मांगना चाह रही है, लेकिन ट्रेन चल चुकी थी और वो हमारा इशारा समझ गई थी।

शुक्रवार, 5 अगस्त 2016

#वक्त की आहट समझ लेना #तुम

तेरा दर्द जब आंसू के रास्ते से निकले
गुजरे हुए जमाने यादों से निकले
वक्त की आहट समझ लेना तुम
भीगते सावन में जब कोई किसी के पास से निकले।