रह गई मेरी देहरी पर आते आते
झांककर वो वहीं ठहर गई
थोड़ी सी मुस्कुराई, शरमाई और लौट गई
हमने भी देहरी से और शहर का रास्ता देख लिया
अब जो आएगी देहरी पर तो वो रूआँसु से होके जायेगी
रह गई मेरी देहरी पर आते आते
झांककर वो वहीं ठहर गई
थोड़ी सी मुस्कुराई, शरमाई और लौट गई
हमने भी देहरी से और शहर का रास्ता देख लिया
अब जो आएगी देहरी पर तो वो रूआँसु से होके जायेगी
कुछ पल का उबाल
कुछ पल का हाहाकार
फिर हम एक धुन में होंगे
आगे बढेंगे फिर बढेंगे
मालायें पहनाई जायेंगी
दीप जलाए जायेंगे
मेरी शहादत पर
फिर से सियासत का रंग चढ़ाया जाएगा
कुछ अपने ही कर्ता धर्ता
लानत मानत देंगे
फिर सुखभोगी की तरह
सत्ता सुख में खो जायेंगे
जयहिन्द
कौन धरा पर यह किसको भाति है
सुकून नहीं है इस हसीं दुनिया
आजकल हवा भी बदली है
घिरे हैं यहां बहुतों से
पर खुद को अकेला पाते हैं
उम्मीद जो पाले हैं दूसरे से
यकीन मानिए रोते होंगे रोज
दरअसल ये जो दिखती है दुनिया
ख़ुशी और गम दोनों समेटे है
दर्द हो तो पल भर के लिए रो लो
पर मुस्कुराना क्यों छोड़ों
बहुत से हैं जो भूखे सोते हैं
आप तो खा के सोते हैं
दोष न किसी का यहाँ
बस किरदार निभा रहे सभी
जो किरदारों में ढल गया
सदा खुश है वो