विवेक का आनंद
बुधवार, 13 जुलाई 2016
तेरी #याद ने
तेरी याद ने
मुझे उस खूंटी तक खींच लाई
जहां वर्षों पहले हमने झोला टांगा था
झोला उठाके हमने
उसमें से वो किताब निकाली
जिसमें तुमने गुलाब दबाकर दिया था
गुलाब देखकर
अन्तस मन से एक ही आवाज निकली
जहां भी रहो बस मुस्कुराती रहे
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1G से 5G की स्पीड और इंसानों की उजड़ती दुनिया, एक नजर कुछ उठते सवालों पर, क्या इनका जवाब है आपके पास
कपोल भीग जाते हैं
कपोल भीग जाते हैं पर आँख तर नहीं होती जीने को दौड़ता हूँ पर दौड़ नहीं होती सिसकियाँ लेकर सो जाता हूँ सिसकियों में विवेक नहीं होती
इस बार भी खामोशी छाई थी
मुझसे मिलने आना तो रंजिश छोडकर आना मेरे दोस्त
मुझसे मिलने आना तो रंजिश छोडकर आना मेरे दोस्त अगर दिल गवाही न दे तो कतई न आना बस याद कर लेना शाम की वो घडी कि हम दोनों साथ हैं हम दोनो...
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